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Surya Namaskar Kitni Baar Karna Chahiye

Surya namaskar kitni baar karna chahiye — शुरुआत से लेकर नियमित अभ्यास तक की पूरी गाइड। ₹1 में Habuild के साथ योग शुरू करें।
Small Vecteezy New Delhi India May 31 2023 Group Yoga Exercise Class 25876492 Small — Habuild

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Surya Namaskar Kitni Baar Karna Chahiye

सूर्य नमस्कार के लिए कोई एक निश्चित संख्या नहीं है — यह आपके स्तर पर निर्भर करती है। शुरुआती अभ्यासियों के लिए 2–4 चक्र पर्याप्त हैं, मध्यवर्ती के लिए 6–12 चक्र और नियमित अभ्यासियों के लिए 12–24 चक्र उचित माने जाते हैं। संख्या से ज़्यादा ज़रूरी है — सही तकनीक और नियमितता।

सूर्य नमस्कार योग का एक ऐसा अभ्यास है जो पूरे शरीर को सक्रिय करता है — मांसपेशियों से लेकर मन तक। लेकिन अधिकांश लोगों के मन में यही सवाल रहता है कि surya namaskar kitni baar karna chahiye — खासकर जब वे अभी शुरुआत कर रहे हों। इस गाइड में आप समझेंगे कि शुरुआती, मध्यवर्ती और अनुभवी अभ्यासियों के लिए सही संख्या क्या है, और किस तरह धीरे-धीरे इसे अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाए।

सूर्य नमस्कार के प्रमुख लाभ

पूरे शरीर को सक्रिय करता है

सूर्य नमस्कार के 12 चरण पीठ, पेट, भुजाओं और पैरों — सभी प्रमुख मांसपेशी समूहों को एक साथ काम में लाते हैं। यह एक संपूर्ण बॉडीवेट वर्कआउट की तरह काम करता है। नियमित अभ्यास से शरीर में लचीलापन और मज़बूती दोनों धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं।

तनाव और मानसिक थकान कम हो सकती है

श्वास के साथ समन्वित यह अभ्यास तंत्रिका तंत्र को शांत करने में सहायक हो सकता है। नियमित योग तनाव प्रबंधन में किस तरह सहायक हो सकता है, यह समझना सूर्य नमस्कार की भूमिका को और स्पष्ट करता है। कुछ ही हफ्तों के नियमित अभ्यास में मानसिक शांति महसूस हो सकती है।

पाचन तंत्र को सुधार सकता है

आगे झुकने और पीछे मुड़ने वाले आसन पेट के अंगों की मालिश करते हैं, जिससे पाचन-क्रिया बेहतर हो सकती है। सुबह खाली पेट किया गया सूर्य नमस्कार इस दिशा में विशेष रूप से प्रभावशाली हो सकता है।

वजन प्रबंधन में सहायक

प्रत्येक सूर्य नमस्कार के एक चक्र में लगभग 3–6 कैलोरी खर्च होती है, जो गति और शरीर के वजन पर निर्भर करती है। वजन घटाने के लिए योग के नियमित अभ्यास में सूर्य नमस्कार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हृदय स्वास्थ्य को सहारा दे सकता है

मध्यम गति से किया गया सूर्य नमस्कार हृदय को सक्रिय रखता है और रक्त संचार बेहतर हो सकता है। यह हल्का कार्डियो का काम भी करता है और समय के साथ हृदय की कार्यक्षमता को सहारा दे सकता है।

सूर्य नमस्कार कैसे शुरू करें

शुरुआत के लिए क्या चाहिए

सूर्य नमस्कार शुरू करने के लिए किसी विशेष उपकरण की ज़रूरत नहीं है। एक योगा मैट, आरामदायक कपड़े और थोड़ी खाली जगह पर्याप्त है। सुबह खाली पेट या शाम को खाने से कम से कम दो घंटे बाद अभ्यास करना सबसे उचित रहता है।

वास्तविक लक्ष्य तय करें

पहले सप्ताह में केवल 2–4 चक्र ही पर्याप्त हैं। लक्ष्य यह नहीं होना चाहिए कि पहले दिन ही 20 चक्र पूरे किए जाएं। स्थिरता और सही तकनीक पर ध्यान देना — यही दीर्घकालिक प्रगति की नींव है।

मूल बातों से शुरुआत करें

सूर्य नमस्कार के 12 चरणों को पहले धीरे-धीरे सीखें — हर चरण में सांस लेने और छोड़ने का समन्वय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जब मुद्राएं सही हो जाएं, तब ही गति और संख्या बढ़ाएं।

सूर्य नमस्कार के मुख्य आसन और उनकी विधि

Surya Namaskar Kitni Baar Karna Chahiye

प्रणामासन (Prayer Pose)

दोनों पैर मिलाकर खड़े हों, हाथ सीने के सामने नमस्कार की मुद्रा में जोड़ें। यह आसन मन को केंद्रित करता है और अभ्यास की शुरुआत के लिए मानसिक तैयारी करता है। यहाँ सांस सामान्य रखें।

हस्त उत्तानासन (Raised Arms Pose)

सांस भरते हुए दोनों भुजाओं को ऊपर उठाएं और हल्का पीछे झुकें। यह रीढ़ को खिंचाव देता है और सीने को खोलता है। कमर को अनावश्यक रूप से न दबाएं।

हस्तपादासन (Standing Forward Bend)

सांस छोड़ते हुए आगे झुकें और हथेलियों को पैरों के पास ज़मीन पर रखें। घुटने मोड़ना ठीक है — जितना झुक सकें उतना झुकें, ज़बरदस्ती न करें। यह हैमस्ट्रिंग और पीठ के निचले हिस्से को खिंचाव देता है।

अश्व संचालनासन (Equestrian Pose)

सांस भरते हुए एक पैर पीछे करें, घुटना ज़मीन पर रखें और छाती को आगे की ओर फैलाएं। यह कूल्हे के लचीलेपन को बढ़ाता है और जांघ की मांसपेशियों को मज़बूत करता है।

भुजंगासन (Cobra Pose)

पेट के बल लेटकर सांस भरते हुए छाती को ऊपर उठाएं — कोहनियाँ थोड़ी मुड़ी हुई रखें। पीठ दर्द से राहत पाने में योग कैसे सहायक हो सकता है, यह जानने के लिए भुजंगासन एक उपयोगी शुरुआत है। पेट को ज़मीन पर टिकाए रखें और गर्दन को अत्यधिक पीछे न मोड़ें।

अधोमुख श्वानासन (Downward Facing Dog)

सांस छोड़ते हुए पीठ और पैरों से उल्टे V आकार में आएं। एड़ियाँ ज़मीन की ओर दबाएं और रीढ़ सीधी रखें। यह पूरी पीठ, कंधों और पिंडलियों को एक साथ खिंचाव देता है।

अष्टांग नमस्कार (Eight-Limb Salutation)

अष्टांग नमस्कार में आठ अंग — दोनों पैर, दोनों घुटने, छाती, ठोड़ी और दोनों हथेलियाँ — एक साथ ज़मीन से स्पर्श करते हैं। यह भुजाओं और कंधों को मज़बूत करता है। इस मुद्रा में श्वास को धीरे से रोककर रखें।

सूर्य नमस्कार में होने वाली सामान्य गलतियाँ

वार्म-अप छोड़ देना

सीधे सूर्य नमस्कार शुरू करने से मांसपेशियों में खिंचाव या चोट लग सकती है। कम से कम 3–5 मिनट की हल्की स्ट्रेचिंग या गहरी सांस से शरीर को तैयार करें।

आसनों के दौरान सांस रोकना

सूर्य नमस्कार की शक्ति सांस और हलचल के समन्वय में है। सांस रोकने से न केवल अभ्यास का लाभ कम होता है, बल्कि थकान भी जल्दी आती है। हर आसन में सांस लेने या छोड़ने का क्रम ध्यान से सीखें।

शुरुआत में ही बहुत अधिक चक्र करना

पहले दिन 20–30 चक्र करने की कोशिश शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। धीरे-धीरे संख्या बढ़ाना ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है। शुरुआत 2–4 चक्र से करें।

अनियमित अभ्यास

हफ्ते में एक बार 30 चक्र करने की तुलना में रोज़ 5–8 चक्र करना कहीं अधिक प्रभावशाली होता है। नियमितता ही वह तत्व है जो सूर्य नमस्कार को वास्तव में परिवर्तनकारी बनाता है।

सूर्य नमस्कार किनके लिए उपयुक्त है?

शुरुआती अभ्यासी

जो लोग योग में नए हैं, उनके लिए सूर्य नमस्कार एक आदर्श प्रारंभ बिंदु है। इसके लिए न किसी पूर्व अनुभव की ज़रूरत है और न किसी विशेष लचीलेपन की। बस धैर्य और नियमितता चाहिए।

महिलाएं

महिलाओं के लिए सूर्य नमस्कार हार्मोनल संतुलन बनाए रखने, तनाव कम करने और ऊर्जा स्तर बनाए रखने में सहायक हो सकता है। मासिक धर्म के दौरान अभ्यास की तीव्रता कम रखें और किसी योग विशेषज्ञ की सलाह लें।

वरिष्ठ नागरिक

60 वर्ष से अधिक आयु के लोग धीमी गति से सूर्य नमस्कार कर सकते हैं, जो जोड़ों की गतिशीलता और मांसपेशियों की मज़बूती के लिए सहायक हो सकता है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

कामकाजी पेशेवर

व्यस्त दिनचर्या में भी सूर्य नमस्कार के 10–12 चक्र 15–20 मिनट में पूरे किए जा सकते हैं। यह पीठ के दर्द, कंधों की अकड़न और मानसिक थकान में धीरे-धीरे राहत दे सकता है।

हमारे सदस्य क्या कहते हैं

प्रिया शर्मा, दिल्ली: “पहले मुझे लगता था कि सूर्य नमस्कार सिर्फ उनके लिए है जो लंबे समय से योग कर रहे हैं। Habuild के साथ मैंने 4 चक्रों से शुरुआत की और धीरे-धीरे 12 तक पहुंची। अब सुबह बिना सूर्य नमस्कार के दिन अधूरा लगता है।”

अमित वर्मा, पुणे: “ऑफिस में बैठे-बैठे पीठ और कंधों में बहुत दर्द रहता था। Habuild के live sessions में रोज़ाना सूर्य नमस्कार करने के बाद धीरे-धीरे फर्क महसूस हुआ। सबसे अच्छी बात — घर से ही सब होता है।”

एक ऐसी योग दिनचर्या बनाएं जो टिके

सूर्य नमस्कार से वास्तविक बदलाव तब आता है जब यह एक आदत बन जाए — न कि कभी-कभी की गतिविधि। नियमित मार्गदर्शन, सही तकनीक और एक सहायक समुदाय के बिना अधिकांश लोग कुछ हफ्तों में रुक जाते हैं।

Habuild के Yoga Everyday प्रोग्राम के साथ आप पाते हैं:

  • रोज़ाना लाइव गाइडेड योग सेशन
  • शुरुआती से उन्नत स्तर तक की क्रमबद्ध प्रगति
  • बिना किसी उपकरण के, घर से अभ्यास
  • विशेषज्ञ मार्गदर्शन जो सही मुद्रा सुनिश्चित करे
  • एक सक्रिय समुदाय जो आपको प्रेरित रखे

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